वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य मेंश्विक्षा मेंमूल्योंका महत्व एवोंमूल् द्वन

Authors

  • Ashwanal Kumar Maurya 1शोध छात्र लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ. Author
  • Prof. Sunil Kumar प्रोफे सर, आचाययनरेन्द्रदेि टीचसयटरेवनिंग, पी0 जी0 कॉलेज सीतापुर। Author

Keywords:

ितयमान िैवश्वक पररपे्रक्ष्य मेंवशक्षा, मूल्य, मूल्योिंका महत्व, मूल्य द्वन्द

Abstract

मनुष्य वजस समाज मेंरहता हैउसमेंउसके आदशयआचार - विचार ही मूल्य कहलातेहै। मूल्योिं की प्रवतष्ठा समाज मेंतब प्रभािी और अनुकरणीय हो जाती है। जब उनका वियात्मक स्वरूप दृश्यमान होता है। वशक्षा तथा मूल्य एक - दू सरे सेमानि सभ्यता के अनावदकाल सेही सहसम्बन्धित है। मूल्य ही वशवक्षत समाज के उत्थान ि पतन का वनधायरण करतेहैं। मनुष्य सभ्यता के अनावदकाल से ही अपनेअन्धित्व के विकास तथा पररमाजयन के वलए प्रयासरत्रहा है। सदैि उसनेसाधारण सेअच्छा तथा अच्छेसेबेहतर के वलए अपनेपररश्रम तथा बुन्धि को वदशा दी है। इन्ी िं सेउसनेअपनेअन्दर सदगुणोिं का विकास तथा दुष्प्रिृवियोिं का पररमाजयन वकया है। आधुवनक काल के वचन्तन मेंआज भी भारतीय प्राचीन सभ्यता और सिंस्कृ वत का विवनयोग वनरन्तर बना हुआ है। अनावदकालीन परम्परा सेमानि - जीिन के समग्र क्षेत्र मेंव्याप्त, आचार - विचार प्रणाली अथिा सत्य और न्याय व्यिस्था पर आधाररत गुण - धमयवजनके सहज अनुपालन सेसमाज मेंविषमता के स्थान पर समता, वप्रयता और एकता का िातािरण वनवमयत हो मूल्य प्रणाली के अन्तगयत आता है।

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Published

2026-09-20

How to Cite

Ashwanal Kumar Maurya, & Prof. Sunil Kumar. (2026). वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य मेंश्विक्षा मेंमूल्योंका महत्व एवोंमूल् द्वन. Pedagogy Insights, 1(2), 45-51. https://pedagogyinsights.com/index.php/files/article/view/18